Balrampur: जनपद के नगर तुलसीपुर स्थित राज्यानुदानित मदरसा जामिया अनवारूल उलूम एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता मो० इमरान ने रजिस्ट्रार/निरीक्षक, उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद को शिकायती पत्र भेजकर मदरसे की मान्यता तत्काल निलंबित करने तथा दिए जा रहे सरकारी अनुदान की उच्चस्तरीय जांच कर धनवापसी की मांग की है। शिकायत सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मदरसे में फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से सरकारी अनुदान का दुरुपयोग किया गया। बिना विधिवत कार्यभार ग्रहण कराए वेतन आहरित किए जाने और विदेशी फंडिंग के नाम पर वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम देने का भी आरोप लगाया गया है। वर्ष 2024-25 के वित्तीय रूदाद में मूल अभिलेख गायब होने के बावजूद लेखा-जोखा प्रस्तुत किए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
बताया गया है कि 8 जनवरी 2026 को कार्यवाहक प्रधानाचार्य द्वारा क्षेत्राधिकारी, तहसील तुलसीपुर को अभिलेख गायब होने की सूचना दी गई थी। इसके बावजूद वित्तीय दस्तावेज तैयार किए जाने से पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि लॉकडाउन अवधि में कथित फर्जी बैठकों के आधार पर तीन नियुक्तियां की गईं।
भूमि विवाद ने बढ़ाई गंभीरता
मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ता ने राजस्व अभिलेखों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है । गाटा संख्या 692 एवं 693 की भूमि का हिस्सा ‘नवीन परती’ श्रेणी में दर्ज है। आरोप है कि मदरसे का निर्माण आंशिक रूप से सरकारी भूमि पर किया गया है तथा भूमि एवं भवन संबंधी मानकों की अनदेखी की गई है।
न्यायालय और पुलिस तक पहुंचा मामला
प्रकरण को लेकर पूर्व में जनहित याचिका दायर की जा चुकी है। कार्रवाई न होने पर अवमानना याचिका भी दाखिल की गई। शासन के निर्देश पर थाना तुलसीपुर में मुकदमा पंजीकृत है, जिस पर पुलिस द्वारा जांच की जा रही है।
गंभीर आरोपों के बीच अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो मदरसे की मान्यता निलंबित होने और राज्यानुदान पर रोक लगने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। देवीपाटन संदेश इस प्रकरण पर आगे भी नजर बनाए हुए है।


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