पत्र में कहा गया है कि तुलसीपुर नगर प्राचीन एवं प्रसिद्ध 51 सिद्ध पीठ श्री देवीपाटन धाम की पावन स्थली में स्थित है, जिसका धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत उच्च है। लंबे समय से क्षेत्रवासी मांग कर रहे हैं कि नगर की पहचान को उसकी आस्था से जोड़ते हुए “तुलसीपुर देवीपाटन धाम” नाम घोषित किया जाए।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पहले भी मुगलसराय का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर तथा विंध्याचल को “विंध्याचल धाम” घोषित कर जनभावनाओं का सम्मान किया गया है। उसी क्रम में तुलसीपुर के नाम परिवर्तन की मांग को भी न्यायोचित बताया गया है।
इसके साथ ही, हाल ही में घोषित गोरखपुर-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस (14045/14046) के तुलसीपुर रेलवे स्टेशन पर ठहराव न होने पर भी क्षेत्रवासियों में नाराजगी है। जबकि यह ट्रेन निकटवर्ती बढ़नी और बलरामपुर स्टेशनों पर ठहरने की घोषणा की गई है, ऐसे में सीमावर्ती एवं धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तुलसीपुर की अनदेखी को अनुचित बताया जा रहा है।
चौरसिया ने मुख्यमंत्री से पुनः अनुरोध किया है कि तुलसीपुर के नाम परिवर्तन हेतु आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाए, साथ ही रेल मंत्री को पत्र लिखकर अमृत भारत एक्सप्रेस का ठहराव अमृत भारत तुलसीपुर स्टेशन पर सुनिश्चित कराया जाए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस निर्णय से न केवल क्षेत्र की धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी, बल्कि नेपाल सीमा से जुड़े हजारों यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।


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