बल्कि मनमानी भी थी और व्यक्तिगत लाभ के लिए संचालित की गई थी ।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता का आरोप प्रथम दृष्टया पीड़ितों के मानवाधिकार का उल्लंघन भी है। रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग लखनऊ को नोटिस जारी कर के शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराये।
सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर तलहा अंसारी ने NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो को भेजे गए विस्तृत पत्र में दावा किया था कि रजिस्ट्रार आर. पी. सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों को विभिन्न मदरसों में नियुक्त कराया। जिनमें मानवेंद्र बहादुर सहायक अध्यापक मदरसा जामिया अरबिया इमदादुल उलूम, बाराबंकी,यशवंत सिंह सहायक अध्यापक मदरसा आलिया मिस्बाहुल उलूम, सब्ज़ी मंडी, प्रयागराज व काजल सिंह (रजिस्ट्रार की भतीजी) जो कि मदरसा चश्मे हयात, रेहटी, जौनपुर में नियुक्त हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन नियुक्तियों पर अनुमोदन आदेशों पर खुद रजिस्ट्रार सिंह के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
इसी तरह से बलरामपुर में भी पूर्व रजिस्ट्रार आरपी सिंह द्वारा मदरसा अहले सुन्नत फखरुल उलूम जनपद बलरामपुर में एक फर्जी प्रबंध तंत्र को अपने पद के दुरुपयोग के कारण केयरटेकर शब्द के माध्यम से प्रबंधक के रूप में तैनात किए जाने का प्रकरण प्रकाश में आया । जिसके कारण फर्जी प्रबंधक द्वारा प्रधानाचार्य अब्दुल वहाब को अनियमित रूप से निलंबित कर दिया गया । जिसे वर्तमान रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड द्वारा अमान्य करार दिया गया था एवं कार्यवाहक प्रधानाचार्य के जबरन चार्ज ना दिए जाने के कारण प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के निर्देश दिए गए थे।
पूरे मामले को लेकर मदरसा बोर्ड के डायरेक्टर अंकित अग्रवाल ने बताया कि पूरे मामले पर जांच की जा रही है।

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