Balrampur: रामविलास अग्रवाल सरस्वती शिशु मंदिर, तुलसीपुर में सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम बड़े ही हर्षोल्लास पूर्व के मनाया गया है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मन्नू तिवारी ,अध्यक्षा सरोज देवी , मुख्य वक्ता मीनू गुप्ता , विशिष्ट वक्ता रागिनी गुप्ता और प्रवक्ता रुचि शुक्ला ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य रविंद्र नाथ तिवारी ने सभी का स्वागत करते हुए अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। महिलाओं को संबोधित करते हए मीनू गुप्ता ने कहा कि नारी आज करुणा ही नहीं, ज्ञान, साहस और नेतृत्व की भी प्रतीक है। उन्होंने परिवार और समाज में नारी की भूमिका और उसकी अंतर्निहित शक्तियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विशिष्ट वक्ता रागिनी गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण को मानव का प्रथम कर्तव्य बताया। उन्होंने कहा कि घर की स्वच्छता से लेकर वृक्षारोपण तक, प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण बचाने के प्रयासों में शामिल होना चाहिए। पूर्व छात्रा शारदा कसौधन ने महिलाओं की नेतृत्व क्षमता, सामाजिक-आर्थिक विकास में उनकी बढ़ती भूमिका और लैंगिक समानता पर प्रभावी विचार रखते हुए नारी शक्ति के प्रति समाज में व्याप्त नकारात्मक सोच का विरोध किया।
वीरांगनाओं के रूप में छात्राओं की प्रेरक प्रस्तुति
विद्यालय की छात्राओं ने ‘प्रेरणादायी महिलाओं के संदेश’ विषय पर विभिन्न ऐतिहासिक वीरांगनाओं के रूप में सुसज्जित होकर मंचन किया—
- रितिका मिश्रा – पन्नाधाय
- रोली जायसवाल – सावित्रीबाई फुले
- लवी सैनी – अहिल्याबाई होलकर
- सैबी गिरी – रानी चेन्नम्मा
- आंचल यादव – लक्ष्मीबाई
- स्वरा भारती – पद्मावती
- अंजनी चौरसिया – दुर्गावती
छात्राओं के ओजपूर्ण परिचय ने उपस्थित मातृशक्तियों को प्रेरित किया।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र
आचार्य बहन भाव्या तिवारी द्वारा आयोजित प्रश्नोत्तरी में माता-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसे सभी ने सराहा।
मुख्य अतिथि मन्नू तिवारी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि सप्तशक्ति संगम नारी के सात गुणों के माध्यम से समाज में नई दिशा देने का सशक्त माध्यम है, जो संस्कारित एवं सशक्त भारत की नींव रखेगा।
कार्यक्रम में विशिष्ट मातृशक्तियों—शोभा बरनवाल, रागिनी गुप्ता, नीलम मिश्रा—का अंगवस्त्र देकर सम्मान किया गया।
अध्यक्षा सरोज देवी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम प्रत्येक विद्यालय में आयोजित होने चाहिए, क्योंकि ये मातृशक्ति को आत्मबल, अधिकार और कर्तव्य के प्रति जागरूक करते हैं।कार्यक्रम का संचालन आचार्य मनीषा भारती ने करते हुए समापन पर सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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