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Saturday, 29 November 2025

Upnews:मदरसों में एमडीएम गबन के बाद अंकपत्र सत्यापन की मांग तेज

कई जनपदों में उजागर हो चुका है फर्जी अंकपत्र का खेल

बलरामपुर जनपद में मदरसों में मिड-डे मील (एमडीएम) में 11 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का पर्दाफाश होने के बाद अब इन मदरसों से जारी अंकपत्रों के सत्यापन को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इससे पहले सिद्धार्थ नगर, बस्ती और कुशीनगर में फर्जी अंकपत्र जारी होने के मामलों में तत्कालीन रजिस्ट्रार पर कार्रवाई भी हो चुकी है। सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की जांच किसी दूसरे विभाग से कराने की मांग की है, ताकि फर्जी अंकपत्रों के माध्यम से घुसपैठ और भारतीय नागरिकता हासिल करने जैसी संभावित साजिशों का भी खुलासा हो सके।

  गत गुरुवार को बलरामपुर में दर्ज हुए 11 करोड़ रुपये के एमडीएम गबन मामले के बाद फर्जी छात्र संख्या और कूटरचित दस्तावेजों को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। बीएसए शुभम शुक्ला की तहरीर पर नगर कोतवाली में मामला दर्ज कर पुलिस ने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

प्रदेश के मदरसों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर लगातार आवाज उठाने वाले जौनपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र दुबे ने बातचीत में बताया कि बस्ती और कुशीनगर जिलों में फर्जी अंकपत्रों का खेल पहले ही उजागर हो चुका है। उनकी आरटीआई से प्राप्त जानकारी के आधार पर तत्कालीन मंडलायुक्त बस्ती की जांच रिपोर्ट में रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इन्हीं आरोपों के आधार पर राज्य सरकार ने 12 फरवरी 2024 को उन्हें निलंबित किया था, हालांकि जांच के दौरान उनकी हुई बहाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ता ने वर्ष 2022 से अब तक मदरसों से जारी सभी अंकपत्रों की विस्तृत जांच कराने की भी मांग की है।
 बलरामपुर जनपद के कई मदरसों में छात्रों की संख्या बढ़ाकर दिखाने और एमडीएम का धन हड़पने का मामला बीते चार वर्षों से चल रहा था, जिसका हाल ही में खुलासा हुआ है। 
अब यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि दर्ज छात्रों के नाम पर फर्जी अंकपत्र भी जारी किए गए होंगे। सीमावर्ती जनपदों — कुशीनगर, सिद्धार्थनगर और बस्ती — में पहले ही फर्जी अंकपत्रों का भंडाफोड़ हो चुका है। 

उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के निदेशक अंकित अग्रवाल ने बताया कि अभी तक इस संबंध में कोई प्रत्यक्ष इनपुट बोर्ड के संज्ञान में नहीं आया है। यदि ऐसी कोई शिकायत या प्रमाण सामने आता है तो पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

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