गुरुवार सुबह से ही हजारों श्रद्धालु मां शैलपुत्री के दर्शन और पूजन-अर्चन के लिए मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां श्रद्धालु “जय माता दी” के जयकारों के साथ अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
इसी के साथ ऐतिहासिक देवीपाटन राजकीय मेले का भी विधिवत शुभारंभ हो गया है। यह मेला पूरे एक माह तक चलेगा। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक माना जाता है। दूर-दराज के जनपदों सहित पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
देवीपाटन मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व विशेष है।
--- मां सती का यहां गिरा था पट सहित वाम स्कंध
मान्यता है कि यह 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का वाम कंधा (स्कंध) पट सहित गिरा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना गुरु गोरखनाथ द्वारा की गई थी। जनश्रुति है कि यहां मां पाटेश्वरी की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन और आरती का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालु व्रत रखकर मां से सुख-समृद्धि और शांति की कामना कर रहे हैं।
मेले को लेकर जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल के साथ स्वयंसेवकों को भी तैनात किया गया है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।


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