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Thursday, 26 September 2024

Balrampur News: शिवगढ़ धाम पचपेड़वा व हनुमान मंदिर बलरामपुर का होगा सौंदर्यीकरण

तकरीबन 4 करोड रुपए की लागत से होगा विकास कार्य 

प्रभाकर कसौधन  
बलरामपुर । वंदन योजना के तहत जनपद के पचपेड़वा स्थित पौराणिक शिव मंदिर शिवगढ़ धाम व नगर बलरामपुर स्थित ऐतिहासिक प्रसिद्ध हनुमान मंदिर का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा । जिसको लेकर जिलाधिकारी ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। स्वीकृति मिलते ही तकरीबन चार करोड रुपए की लागत से इन पौराणिक स्थलों को विकसित किया जाएगा।
 जिलाधिकारी ने बताया कि रानी तालाब के निकट स्थित हनुमान मन्दिर सांस्कृतिक, पौराणिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के दृष्टिगत अत्यन्त महत्वपूर्ण है। हनुमान मन्दिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सम्पर्क मार्ग, परिक्रमा पथ, विश्रामालय, हवन कुण्ड शेड, बेंच एवं घाट, सीढ़ी निर्माण कार्य तथा सम्पर्क मार्ग तिराहा का सौन्दर्यीकरण कार्य कराने के लिए 01 करोड़ निन्नान्बे लाख 65 हजार रूपए का बजट का प्रस्ताव भेजा गया है। इसी प्रकार नगर पंचायत पचपेड़वा क्षेत्र स्थित पौराणिक प्रसिद्ध शिवगढ़ धाम मन्दिर के सौन्दर्यीकरण के लिए हॉल का निर्माण, मुनीर महतौ के मकान से शिवगढ़ धाम मन्दिर तक सीसी रोड निर्माण का , वार्ड नम्बर-9 में सिसहनिया से शिवगढ़ धाम मन्दिर में परिसर के आस-पास 110-130 वॉट एलईडी लाईट एवं 09 मीटर आक्टोगोनल पोल की आपूर्ति एवं स्थापना का कार्य कराने के लिए 01 करोड़ निन्नाबे लाख 90 हजार रूपए का बजट आवंटन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। बताया की स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
 उल्लेखनीय है कि मान्यता के अनुसार शिवगढ़ धाम मन्दिर एक पौराणिक एवं 200 वर्ष पुराना भू-गर्भ से प्राप्त एक स्वयं-भू शिवलिंग व माता पार्वती का मन्दिर है जहां पर पूरे वर्ष दर्शनार्थियों का आना-जान लगा रहता है। श्रावण मास में जिले की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा जो कि देवीपाटन शक्तिपीठ के सूर्यकुण्ड से जल लेकर कांवड़िये शिवगढ़ धाम मन्दिर पर हजारों की संख्या मे जलाभिषेक के लिए आते हैं। इसी प्रकार रानी तालाब के पास स्थित हनुमान मन्दिर का भी अपना पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है जहां पर हनुमान जयन्ती, ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल एवं प्रत्येक मंगलवार व शनिवार को श्रद्धालु काफी संख्या में दर्शनार्थ आते हैं। उन्होंने कहा कि पौराणिक महत्व के दोनों मन्दिरों के सौन्दर्यीकरण एवं अवस्थापना सुविधाओं के हो जाने से श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिलेगी तथा धरोहरों का संरक्षण भी हो सकेगा।

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